रत्न और ज्योतिष का गहरा संबंध प्राचीन वैदिक शास्त्रों में बताया गया है। प्रत्येक ग्रह से जुड़ा एक विशेष रत्न होता है, जिसे सही विधि से पहनने पर जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखे जा सकते हैं।
रत्न और ज्योतिष का ऊर्जा-वैज्ञानिक संबंध
आज हम रत्न (Gemstones) और ज्योतिष के आपसी संबंध पर चर्चा कर रहे हैं। यह विषय केवल आस्था पर नहीं, बल्कि ऊर्जा, तरंगों और प्रकृति के सूक्ष्म सिद्धांतों पर आधारित है।
रत्न और ज्योतिष
नौ तरंगें और मानव शरीर
रत्न और ज्योतिष का संबंध क्या है
हमारा शरीर — या किसी भी जीवित इकाई का शरीर — नौ प्रमुख तरंगों (Main Energy Waves) के संतुलित समीकरण से बनता है और कार्य करता है। इन्हीं तरंगों के अनुपात पर व्यक्ति का: व्यक्तित्व, गुण–दोष, भाग्य, स्वास्थ्य,जीवन की दिशा निर्धारित होती है।
नौ ग्रह = नौ तरंगों के प्रतिनिधि
ज्योतिष के नौ ग्रह इन्हीं नौ मूल तरंगों के प्रतिनिधि हैं। ये तरंगें ब्रह्मांडीय ऊर्जा स्रोतों से निकलकर जीवात्मा तक पहुंचती हैं। शिवलिंग को ऊर्जा-संरचना का सर्वोत्तम प्रतीक माना गया है, क्योंकि जिस प्रकार से शिवलिंग की आकृति होती है, उसी प्रकार इन ऊर्जा बिंदुओं की संरचना भी होती है। रत्नों की भूमिका प्रत्येक रत्न में यह विशेष गुण होता है कि वह प्रकृति से आने वाली किसी विशिष्ट ग्रह-तरंग को: अवशोषित (Absorb),संग्रहित (Store)और प्रसारित (Transmit) कर सकता है। इसी वैज्ञानिक गुण के कारण हमारे प्राचीन विद्वानों ने प्रत्येक ग्रह के लिए एक विशिष्ट रत्न का चयन किया।
रत्न पहनने के लाभ और हानि
उदाहरण: सूर्य और माणिक्य सूर्य से संबंधित तरंगें — जो नाभिक हृदय जीवात्मा छोड़ता है वही तरंग माणिक्य ग्रहण करता है,अब यदि शरीर की तरंगों में सूर्य की तरंग कमजोर पड़ रही है तो माणिक्य को बदन में लगाए रखने से उसे सूर्य की अतिरिक्त तरंग प्राप्त हो गई और उसकी कमी पूरी हो गई l इसका प्रभाव उसकी आयु, हृदय की शक्ति, दृष्टि, सोच विभिन्न तरंगों की मात्रा को बदल देगी इसका फल उसके भाग्य पर पड़ेगा ही परंतु यदि सूर्य बलवान है और माणिक्य पहन लिया तो सूर्य और तेज हो जाएगा और उसके तप से अनेक समस्याएं खड़ी हो जाएगी, सारी तकलीफ में बढ़ जाएगी इसीलिए रत्न में यही होता है लगभग सभी रत्न में यही अवगुण और गुण कहे जाते हैं रत्न के लिए विशेष धातु भी निश्चित है कौन-कौन से रन पर कौन सी धातु का प्रयोग होगा इसका सूत्र में आगे बताऊंगा किसी को रत्न बताने से पूर्व उसकी कुंडली और व्यक्तित्व का अच्छी तरह परीक्षण करके यह ज्ञात कर लेना चाहिए कि उस जातक का कौन सा ग्रह दुख दें रहा है फिर उसे ग्रह की प्रकृति का ज्ञान करना चाहिए कि वह निर्बल है या सबल यदि निर्बलता दुख दे रही है तो इस ग्रह का रत्न बताएं सफलता कष्ट दे रही है तो तेज को कम करने वाले सहयोगी ग्रह का रत्न बताएंl
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विशेष नोट यह ज्योतिषीय आकलन किया गया है किसी भी प्रकार की लाभ हानि के लिए astrodheerendra.com जिम्मेदार नहीं है
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