राहु-केतु का अचानक असर 90 दिन में जीवन बदलने वाले चौंकाने वाले संकेत

राहु-केतु का अचानक असर 90 दिन में जीवन बदलने वाले चौंकाने वाले संकेत

राहु-केतु का अचानक असर तब दिखाई देता है जब व्यक्ति की कुंडली में ये छाया ग्रह सक्रिय हो जाते हैं, राहु-केतु का अचानक असर 90 दिन में जीवन बदलने वाले संकेत” —  हमारे वैदिक सनातन ज्योतिष शास्त्रों में केतु  और राहु को छाया ग्रह कहा गया है, लेकिन इनका प्रभाव कई बार दृश्य ग्रहों से भी अधिक तीव्र और जीवन बदल देने वाला होता है खासकर उस समय जब राहु-केतु की महादशा, अंतर्दशा, गोचर या किसी महत्वपूर्ण भाव/ग्रह से इनका अचानक संबंध बनता है, ऐसे समय में मात्र 90 दिनों के भीतर व्यक्ति के जीवन में बड़े और चौंकाने वाले बदलाव देखने को मिलते हैं, जैसे बिना योजना के नौकरी बदल जाना या अचानक बड़ा अवसर हाथ में मिल जाना, वर्षों से अटका पैसा मिल जाना या फिर एक झटके में कर्ज, विवाद या मानसिक अशांति का बढ़ जाना इसका कारण होता है कुंडली में राहु जब कुंडली के 1, 10 या 11वें भाव को सक्रिय करता है तो व्यक्ति की सोच अचानक बड़ी हो जाती है, वह जोखिम लेने लगता है, नई टेक्नोलॉजी, ऑनलाइन काम, शेयर मार्केट, क्रिप्टो, मीडिया या विदेश से जुड़े क्षेत्रों की ओर बहुत ही आकर्षित होता है और कई बार अप्रत्याशित धन लाभ भी मिलता है, वहीं केतु जब 4, 7 या 12वें भाव पर प्रभाव डालता है तो व्यक्ति के भीतर  मन ही मन वैराग्य, अकेलापन, रिश्तों से दूरी या अचानक स्थान परिवर्तन के योग बनने लगते है, 90 दिन के इस चक्र में सबसे बड़ा संकेत यह होता है कि उस व्यक्ति/ जातक का मन पहले जैसा नहीं रहता, इस तरह राहु-केतु का अचानक असर 90 दिन के भीतर जीवन की दिशा बदल देता है।उसे पुराने काम, लोग और दिनचर्या बोझ लगने लगती है और वह बिना स्पष्ट कारण के जीवन की दिशा बदलने लगता है; राहु-केतु के सक्रिय होते ही सपनों का स्वरूप बदल जाता है, बार-बार सांप, ऊँचाई से गिरना, अजनबी चेहरे या अंधेरे रास्ते दिखना भी संकेत हो सकते हैं कि अवचेतन मन किसी बड़े परिवर्तन के लिए तैयार हो रहा है, इसी अवधि में अचानक किसी गुरु, ज्योतिष, आध्यात्मिक पुस्तक या मंत्र की ओर खिंचाव होना केतु के प्रभाव को दर्शाता है, जबकि राहु के प्रभाव में व्यक्ति दिखावे, प्रसिद्धि, सोशल मीडिया, वायरल होने या जल्दी सफल होने की तीव्र इच्छा महसूस करता है; यदि इन 90 दिनों में बार-बार तकनीकी खराबी, गलत फैसले या भ्रम की स्थिति बने तो समझना चाहिए कि राहु भ्रम पैदा कर रहा है और धैर्य अत्यंत आवश्यक है, वहीं अगर अचानक पुरानी समस्याएं अपने आप समाप्त होने लगें, अनावश्यक लोग जीवन से दूर हो जाएं और मन हल्का महसूस हो तो यह केतु द्वारा नकारात्मक कर्मों की कटौती का संकेत माना जाता है; कुल मिलाकर राहु-केतु का यह 90 दिन का चक्र व्यक्ति को तोड़ता भी है और बनाता भी है, फर्क सिर्फ इतना होता है कि व्यक्ति इन संकेतों को पहचानकर सही दिशा में निर्णय लेता है या भ्रम, जल्दबाजी और डर में गलत कदम उठा बैठता है, इसलिए इस अवधि में बड़े फैसले सोच-समझकर, अहंकार से दूर रहकर और आत्मविश्लेषण के साथ लिए जाएं, क्योंकि राहु-केतु का अचानक असर अक्सर जीवन की पुरानी स्क्रिप्ट को बदलकर एक बिल्कुल नई कहानी लिख देता है।इस तरह राहु-केतु का अचानक असर 90 दिन के भीतर जीवन की दिशा बदल देता है।आशा है आपको यह ज्योतिषी ज्ञान अच्छे से समज आया होगा ।

नोट: हर व्यक्ति की कुंडली अलग होती है, इसलिए राहु-केतु का प्रभाव भी व्यक्ति विशेष की कुंडली पर निर्भर करता है।

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