गुरु मजबूत हो तो क्या होता है?
आज हम बात करते है की यदि कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत हो नीच का नहीं हो तो ज्योतिष में महत्व ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह को सबसे शुभ और कल्याणकारी ग्रह माना गया है। गुरु को बृहस्पति, देवगुरु, ज्ञान, धर्म, भाग्य, संतान, विवाह, धन और आध्यात्मिक उन्नति का कारक ग्रह कहा गया है। जिस जातक की कुंडली में गुरु मजबूत होता है, उसका जीवन स्वतः ही सही दिशा में चलने लगता है।
ज्योतिष में कहा गया है की गुरु ग्रह केवल धन या सफलता ही नहीं देता, बल्कि व्यक्ति को सही निर्णय लेने की शक्ति भी देता है। यही कारण है कि गुरु को “मार्गदर्शक ग्रह” भी कहते है ।
कुंडली में गुरु मजबूत होने का भावार्थ क्या है?
जब गुरु अपनी उच्च राशि (कर्क), स्वगृही (धनु या मीन) में हो, केंद्र या त्रिकोण भाव में स्थित हो, पाप ग्रहों से पीड़ित न हो और शुभ दृष्टि प्राप्त कर रहा हो तब गुरु को मजबूत मानते है।
मजबूत गुरु हमारे जीवनकाल में अच्छे परिणाम देता है जैसे की भाग्य का साथ होना, सही समय पर सही अवसर का मिलना,ईश्वर पर आस्था बढ़ाना और समाज में सम्मान बढ़ना ये एक संकेत होते है की आपकी कुंडली में गुरु मजबूत है ।
अब हम बात करते है की जब गुरु मजबूत हो तो जीवन में क्या-क्या होता है?
(i). भाग्य स्वतः ही मजबूत हो जाता है गुरु भाग्य का कारक ग्रह माना गया है। जब गुरु मजबूत होता है तो व्यक्ति को बिना अधिक संघर्ष के भी अवसर मिलने लगते हैं। उसके रुके हुए काम अचानक बनने लगते हैं और जीवन में स्थिरता आने लगती है।
(ii). आर्थिक स्थिति और धन में सुधार मजबूत गुरु होने से धन संचय की क्षमता बढ़ा देता है। ऐसा व्यक्ति: सही जगह निवेश करता है फालतू खर्चों को बचाता है, धीरे-धीरे स्थायी संपत्ति बनाता है और गुरु मजबूत हो तो धन टिकता है।
(iii). ज्ञान और शिक्षा में सफलता गुरु शिक्षा, विद्या और उच्च ज्ञान का कारक होता है। ऐसे जातक अपने जीवन काल में पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करते हैं एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होते हैं, शिक्षक, सलाहकार, ज्योतिषी, वकील या गाइड बनते हैं।
(iv). वैवाहिक सुख पुरुष की कुंडली में गुरु पत्नी का कारक होता है। मजबूत गुरु होने पर अच्छा जीवनसाथी मिलता है
विवाह में देरी नहीं होती है एवं दांपत्य जीवन स्थिर रहता है और यदि महिला की कुंडली में भी गुरु शुभ हो तो पति विद्वान और सम्मानित होता है।
(v). संतान का प्रमुख कारक है। गुरु मजबूत हो तो संतान सुख प्राप्त होता है संतान बुद्धिमान और संस्कारी होती है,
संतान से यश और संतोष मिलता है।
(vi). आध्यात्मिक उन्नति मजबूत गुरु व्यक्ति को धर्म, पूजा, ध्यान और सत्कर्मों की ओर ले जाता है। ऐसा व्यक्ति गलत रास्तों से दूर रहता है ईश्वर में विश्वास रखता है और दूसरों की सहायता करता है।
(vii). समाज/ सामाजिक जीवन में मान-सम्मान गुरु मजबूत हो तो व्यक्ति को समाज में आदर मिलता है, लोग सलाह लेने आते हैं, प्रतिष्ठा और विश्वास प्राप्त होता है
(viii). निर्णय लेने की क्षमता और बुद्धि का विकास होना गुरु मजबूत होने पर व्यक्ति भावनाओं में बहकर निर्णय नहीं लेता
सही-गलत का अंतर समझता है और जीवन में कम गलतियाँ करता है।
अब हम बात करते है की यदि कुंडली में गुरु कमजोर हो तो क्या समस्याएँ आती हैं?
- भाग्य उसका साथ नहीं देता ।
2. व्यक्ति बार-बार गलत फैसले ।
3. उसके पास धन बहुत आता है लेकिन रुकता नहीं है।
4. जातक के विवाह और संतान में बाधा उत्त्पन होती है ।
5. गुरु, पिता या शिक्षक से मतभेद होना स्वाभाविक होता है ।
कुंडली में गुरु को मजबूत करने के उपाय:-
1. गुरुवार का व्रत गुरुवार को व्रत रखें और पीले वस्त्र को पहनें।
2. गुरु मंत्र जाप “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” और 108 बार प्रतिदिन जाप करें।
3. पीले दान / पीली वस्तुओ का दान जैसे चना दाल, हल्दी, पीले वस्त्र, गुड़ आदि का दान करें।
4. गुरु और ब्राह्मण का सम्मान करे अपने गुरु, पिता और शिक्षकों का सम्मान करें।
5. पुखराज रत्न (सलाह लेकर) पहने। यदि योग बनता होतो ही पुखराज रत्न को धारण करें।
कुंडली में यदि गुरु ग्रह यदि कुंडली में मजबूत हो तो व्यक्ति का जीवन अपने आप संतुलित, सफल और सम्मानजनक बन जाता है। गुरु केवल धन नहीं देता, बल्कि सही सोच, सही दिशा और सही समय पर सही निर्णय लेने की शक्ति देता है। इसलिए जीवन में गुरु को मजबूत रखना अत्यंत आवश्यक है। किसी भी प्रकार के उपायों को करने से पूर्व अपनी कुंडली का विश्लेषण जरूर से करवाए ।
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