30 के बाद शादी क्यों नहीं हो रही? कुंडली का ये दोष चुपचाप जिंदगी रोक रहा है

30 के बाद शादी क्यों नहीं हो रही? कुंडली का ये दोष चुपचाप जिंदगी रोक रहा है

विवाह के सम्बन्ध में हम आज के समय में बहुत से युवक-युवतियां के मन ही मन में यही सवाल पूछ रहे हैं होते है की आखिर सब कुछ ठीक होने के बावजूद भी, अच्छी नौकरी, परिवार की सहमति और रिश्ते आने के बाद भी 30 की उम्र पूरी / पार हो जाने पर भी हमारी शादी क्यों नहीं हो पा रही है, तो आइये अब हम चर्चा करते है कि ज्योतिष शास्त्र में इसका उत्तर बहुत स्पष्ट रूप से कुंडली में छिपा कैसे होता है। विवाह में देरी का सबसे बड़ा कारण होते है, कुंडली में बनने वाले कुछ विशेष ग्रह दोष और योग होते हैं, जो दिखाई तो नहीं देते लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से व्यक्ति के जीवन को अंदर ही अंदर रोकते रहते हैं। ज्योतिष के अनुसार विवाह का सीधा संबंध सप्तम भाव से होता है, लेकिन केवल सप्तम भाव ही नहीं, बल्कि शुक्र, बृहस्पति, चंद्रमा और राहु-केतु की स्थिति भी विवाह में निर्णायक भूमिका निभाती है।

यदि कुंडली में सप्तम भाव कमजोर हो, उसका स्वामी अशुभ ग्रहों से पीड़ित हो या उस पर शनि, राहु या केतु की दृष्टि हो, तो विवाह में लगातार रुकावटें आती रहती हैं। शनि देव नाम के ग्रह को विलंब का ग्रह भी कहा गया है, इसलिए यदि शनि सप्तम भाव में बैठा हो या सप्तम भाव पर दृष्टि डाल रहा हो, तो व्यक्ति का विवाह तय होते-होते टूट जाता है या उम्र बढ़ती चली जाती है। खासकर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के समय विवाह की बातें तो आगे भी नहीं बढ़ पातीं। राहु और केतु का प्रभाव विवाह को भ्रम और असमंजस में ही डाल देता है, जिससे सही निर्णय नहीं हो पाता और रिश्ते अंतिम समय पर टूट जाते हैं। यदि राहु सप्तम भाव में हो या शुक्र के साथ बैठा हो, तो व्यक्ति को बार-बार गलत रिश्ते मिलते हैं या समाजिक कारणों से विवाह टलता चला जाता है।

महिला जातको की कुंडली में यदि शुक्र कमजोर हो या पाप ग्रहों से पीड़ित हो, तो अच्छे प्रस्ताव आने के बाद भी बात आगे नहीं बढ़ पाती, जबकि पुरुषों की कुंडली में यदि बृहस्पति कमजोर हो, तो विवाह में देरी और मानसिक तनाव बना रहता है। कई बार व्यक्ति मांगलिक दोष को ही विवाह में देरी का कारण मान लेता है, लेकिन सच्चाई यह है कि केवल मांगलिक होना ही समस्या नहीं है, बल्कि मांगलिक दोष के साथ यदि शनि या राहु जुड़ जाए तो देरी बहुत ज्यादा हो जाती है। इसके अलावा नवम भाव और द्वादश भाव का संबंध भी विवाह से जुड़ा होता है, क्योंकि नवम भाव भाग्य को दर्शाता है और द्वादश भाव त्याग और एकांत का संकेत देता है, इसलिए यदि नवम भाव कमजोर हो या द्वादश भाव अत्यधिक सक्रिय हो, तो व्यक्ति अनजाने में ही विवाह से दूर रहने लगता है। कई लोग 30 के बाद यह सोचने लगते हैं कि अब शायद शादी उनके भाग्य में नहीं है, लेकिन ऐसा नहीं होता, ज्योतिष में विवाह का योग कभी समाप्त नहीं होता, केवल उसका समय बदलता है। सही दशा और गोचर आने पर वर्षों से रुका हुआ विवाह अचानक तय हो जाता है। विशेष रूप से जब बृहस्पति सप्तम भाव, सप्तम भाव के स्वामी या शुक्र पर अनुकूल दृष्टि डालता है, तब विवाह के योग प्रबल हो जाते हैं। राहु या शनि की महादशा में विवाह में देरी होती है, लेकिन जैसे ही गुरु की दशा या अंतर्दशा आती है, स्थिति तेजी से बदलती है। यही कारण है कि कुछ लोगों की शादी 32, 34 या 36 की उम्र में अचानक हो जाती है, जबकि पहले वर्षों तक कोई संभावना नहीं दिखती। ज्योतिष शास्त्र में ऐसे लोगों के लिए उपाय भी बताए गए हैं, जैसे गुरुवार को पीले वस्त्र पहनना, बृहस्पति को मजबूत करने के लिए चने या हल्दी का दान करना, शुक्र को मजबूत करने के लिए सफेद वस्त्र और सुगंध का प्रयोग करना और शनिवार को शनि शांति के उपाय करना, लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि व्यक्ति धैर्य न खोए और स्वयं को दोष न दे। कुंडली के ये दोष व्यक्ति की योग्यता या सुंदरता से नहीं, बल्कि ग्रहों की ऊर्जा से जुड़े होते हैं। यदि आप 30 के बाद भी अविवाहित हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं कि आपके जीवन में विवाह नहीं होगा, बल्कि इसका संकेत है कि आपकी कुंडली में विवाह का समय थोड़ा आगे खिसक गया है। सही ज्योतिषीय मार्गदर्शन, समय की पहचान और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ यह बाधा भी समाप्त हो सकती है। इसलिए यदि आप यह जानना चाहते हैं कि आपकी कुंडली में कौन सा ग्रह दोष आपकी शादी को रोक रहा है और विवाह का सही समय कब आएगा, तो पूरी जन्म कुंडली का विश्लेषण कराना आवश्यक है, क्योंकि कई बार एक छोटा सा योग आपकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल सकता है। आप अपनी कुंडली का मार्गदर्शन हमारे द्वारा भी करवा सकते है हमसे अपनी कुंडली का मार्गदर्शन करवाने के लिए हमसे सम्पर्क करे +91 9351061536

1 thought on “30 के बाद शादी क्यों नहीं हो रही? कुंडली का ये दोष चुपचाप जिंदगी रोक रहा है”

Leave a Comment